मैनु पौणाहारी दा दीदार हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

जावा बारे नाथ दे मंदिर तो मैनु सच दिखाया अंदर तो,

मेरे जोगी नाथ दे लड़ लग के सत जन्मा दा उधार हो गया,

मैनु पौणाहारी दा दीदार हो गया भव सगरा तो वेहड़ा पार हो गया,

केहड़े जन्मा दा किता पूण मोहरे आ गया,

जेहड़ा मैनु योगी नाथ दर्श दिखा गया,

जन्म तो कोले वांग तप दा कलेजा,

तेरे दर्श दे नाम ठंडा ठार हो गया,

मैनु पौणाहारी दा दीदार हो गया भव सगरा तो वेहड़ा पार हो गया,

डोलन न दिता बड़े दुःख ते कलेश सी,

भरम भुला के तेरा मन्या आदेश सी,

कट के चौरासी दुखड़े मुका गया,

दुखा वाला दाना तार तार हो गया,

मैनु पौणाहारी दा दीदार हो गया भव सगरा तो वेहड़ा पार हो गया,

भगता प्यारेया नु जोगी नाथ तार दा,

हर वेले मान पौणाहारी नु पुकार दा,

सिद्ध योगी मैनु चरना नाल ला लिया,

योगी मेरी रूह दा हक दार हो गया,

मैनु पौणाहारी दा दीदार हो गया भव सगरा तो वेहड़ा पार हो गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।