सरकार चली आओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

एक बार चली आओ सरकार चली आओ,

शेरा वाली चली आओ,

ज्योता वाली चली आओ,

एक बार चली आओ सरकार चली आओ,

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

मेरे दिल के जो छाले हे,

मैं किसे दिखाओ,

चली आओ चली आओ,

मेरी सुनता नही कोई,

मैं किसे दिखाओ माँ,

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

शेरा वाली चली आओ,

ज्योता वाली चली आओ,

मुझे सब ने रुलाया हे,

माँ तुना रुलाना माँ,

चली आओ चली आओ,

मुझे सब ने सताया माँ,

तुना सतना चली आओ चली,

आओ मुझे गले से लगा जाओ,

चली आओ चली आओ,

शेरा वाली चली आओ,

ज्योता वाली चली आओ,

मजधार में कसती तू पार लगा दे माँ,

दुनिया मुझपर हस्ती तू पार लगा दे माँ,

मुझेपार लगा जाओ,

एक बार चली आओ,

शेरा वाली चली आओ,

ज्योता वाली चली आओ,

एक बार चली आओ सरकार चली आओ,

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

चली आओ चली आओ,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानियां सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।