तेरे बूहे आके शेरांवालीये

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चंगा नहियों लगदा ये खाली मुड़ जाना, तेरे बूहे आके शेरांवालीये,

असां वी तां अपना नसीब चमकाना, तेरे बूहे आके शेरांवालीये,

तेरे बूहे आके शेरांवालीये, सागरां तों डूंगे दिल वालीये,

चंगा नहियों लगदा ये खाली मुड़ जाना.........

बड्डे बड्डे महादानी दान तैथों मंगदे,

सानू वी माँ रेहमतां दे रंगां नाल रंग दे,

चारे पासे धूम तेरे नाम दी है मचदी,

तैनू महादातीये कंजूसी नहींयो जचदी,

असां मूहों मंगेया वर हुन पाउना,

तेरे बूहे आके शेरांवालीये.........

अपने ही नाम वाली रख वी लै लाज़ माँ,

थोड़े बहुते साडे वी सँवार छड काज माँ,

अठे पहर सच्चे दिलों तैनू है ध्यायी दा,

बहुता वी नी भगतां नू चक्करां च पाई दा,

असां इस पल्ले नूँ न होर तरसाना,

तेरे बूहे आके शेरांवालीये,...........

दो चार मूठाँ दे तू किंज पासे पायेंगी,

अपनी दया दे सानू चार चन लायेंगी,

आउना जाना संगता दा लगैया ही रहेगा,

सारा ही जहान तेरी जै जैकार करेगा,

जो जिहने मँगना है निर्दोष पाऊना,

तेरे बूहे आके शेरांवालीये...........

पंडित देव शर्मा

रानिया सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।