साईं दर है ज्ञान सरोवर सुखो की आन बंदे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

साईं दर है ज्ञान सरोवर सुखो की आन बंदे,

साईं दर पे मिल जाते है सारे भगवान बंदे,

साईं दर है ज्ञान सरोवर .........

साईं दर से होकर जाता है मंजिल का रास्ता,

इस मंजिल के राही को जग से क्या वास्ता,

साईं दर है गंगा यमुना कर ले इसनान बंदे,

साईं दर है ज्ञान सरोवर सुखो की आन बंदे,

दुर्लब है जिनको दुंड न तप बल के जोर से,

खुद ही वो खिचे आते है श्रधा की डोर से,

साईं भक्ति से जाता है मन का अभिमान बंदे,

साईं दर है ज्ञान सरोवर सुखो की आन बंदे,

साईं दर पे ना आया तो पीछे पश्ताये गा,

दरिया का पानी लौट के वापिस ना आएगा,

कुछ अपनी बन्दगी का करले समान बंदे,

साईं दर है ज्ञान सरोवर सुखो की आन बंदे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।