तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया,

छोड़ा सारा जहां तुझको मना लिया,

तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया,

मस्ती में झूमता हु मैं हर गड़ी हर पल,

जब से तुझे है बाबा अपने दिल में वसा लिया,

छोड़ा सारा जहां तुझको मना लिया,

तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया,

तुझसे बड़ा जहां में कोई रहम दिल नही,

तेरे रहमतो का जलवा मैंने भी पा लिया,

छोड़ा सारा जहां तुझको मना लिया,

तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया,

मुश्किल हर इक मेरी आसान हो गई,

तेरी ज्योत को ऐ बाबा अजब से दिल में वसा लिया,

छोड़ा सारा जहां तुझको मना लिया,

तेरे दर पे सर झुकाया तो ज़न्नत को पा लिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।