माँ मेरी शेरांवाली माँ मेरी ज्योतांवाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ मेरी शेरांवाली, माँ मेरी जोतां वाली,

जय जय माँ माँ, जय जय माँ माँ,

ओ मैया जी -३, आ मैया जी-३,

तेरा बचड़ा पुकारे, (आजा माँ)

तेरा लाल पुकारे,

तेरे भगत पुकारे,

मुझे अपना बनाले मेरी माँ,,,ओ,,,,,,

मैंने सुना है सबकी बिगड़ी बनाती है,

सोये हुए भाग मैया आप जगाती है,

ओ मेरे भाग जगादे भोली माँ,,, ओ,,,,,,

माँ मेरी शेरांवाली, माँ मेरी जोतां वाली,

जय जय माँ माँ, जय जय माँ माँ,

ओ मैया जी -३, आ मैया जी-३,

मुझको न चैन नहीं नींद कभी आती है,

हर पल मैया जी तेरी याद सताती है,

ओ मुझे अपना बनाले भोली माँ,,, ओ,,,,,

माँ मेरी शेरांवाली, माँ मेरी जोतां वाली,

जय जय माँ माँ, जय जय माँ माँ,

ओ मैया जी -३, आ मैया जी-३,

दर पे तुम्हारे मैया जो चल के आता है,

मैंने सुना है उसका भाग खुल जाता है,

ओ मेरी किस्मत जगादे भोली माँ,, ओ,,,,,

माँ मेरी शेरांवाली, माँ मेरी जोतां वाली,

जय जय माँ माँ, जय जय माँ माँ,

ओ मैया जी -३, आ मैया जी-३,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानिया,सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।