दर से तेरे मिलती है खुशियां

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर से तेरे मिलती है खुशियां मिलती नहीं संसार में ,

तेरी दया से मिट जाते है जीवन के सब पाप रे,

दर से तेरे मिलती है खुशियां मिलती नहीं संसार में ,

तेरे हाथ में जीवन नाइयाँ तू ही बाबा मेरा खवइया,

बहती रही जो जन्म जन्म से नाइयाँ लगाओ किनारे,

दर से तेरे मिलती है खुशियां मिलती नहीं संसार में ,

जो भी तेरे द्वारे आया उस ने तेरा प्यार पाया,

तेरा दर वो दूर यहाँ से हो जाते है अंधेरे

दर से तेरे मिलती है खुशियां मिलती नहीं संसार से,

तेरी दया से मिट जाते है जीवन के सब पाप रे,

तेरी शरण हम आये बाबा तू ही काशी तू ही काबा,

काया जाये हज तीर्थ करने जो तू पास हमारे,

दर से तेरे मिलती है खुशियां मिलती नहीं संसार से,

तेरी दया से मिट जाते है जीवन के सब पाप रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।