मेरा सिंगियाँ वाला नाथ मेरी रखवाली करदा है

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॥ पावन पाठ ॥

दिल खिड़ियाँ खिड़ियाँ रेह्न्दा है न किसे तो डर दा है,

मेरा सिंगियाँ वाला नाथ मेरी रखवाली करदा है,

मैं तरले पा पा रहा मनौदा रिश्ते दारा नु,

मैं हारेया सी मैं टूटियां सी सुन सुन फटकारा नु,

मेरे सिर ते हाथ ओहदा जिहदा जग पानी भरदा है,

मेरा सिंगियाँ वाला नाथ मेरी रखवाली करदा है,

मैनु लोकि केहन निकमियाँ तेरा कुज भी बन न नहीं,

मेरी बांह पकड़ बाबा कहंदा पुत्रा ते डरना नहीं,

ओहने अन धन दे नाल भर दिता हर कोना घर दा है,

मेरा सिंगियाँ वाला नाथ मेरी रखवाली करदा है,

लख वार करा शुक्राना जोड़ जोड़ के हथा नु,

ओहने तारेयां विच रुश न दिता गलियां दे कखा नु,

हुन धर्म वीर परदेशी दा ओहदे बाज न सरदा है,

मेरा सिंगियाँ वाला नाथ मेरी रखवाली करदा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।