होली खेले अंजनी के लाल

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

होली खेले अंजनी के लाल सिंधुर की होली खेले ,

श्री राम सियां देख के निहाल सिंधुर की होली खेले

हनुमान पूछे माँ सीता से इक दिन,

माता क्यों लगाती हो सिंधुर प्रति दिन,

माँ बोली प्रभु भक्ति का शृंगार,सिंधुर की होली खेले

होली खेले अंजनी के लाल.......

बोले हनुमान मन में भक्ति अपार है,

राम नाम सिंधुर भक्ति का शृंगार है,

सिंधुर हुआ जैसे गुलाल,सिंधुर की होली खेले

होली खेले अंजनी के लाल .......

लेके सिंधुर अंग अंग मले हनुमत,

मल सिंधुर किलकारी करे हनुमत,

हुये बजरंग बलि लालो लाल,सिंधुर की होली खेले

होली खेले अंजनी के लाल .....

सिया राम जी लग के अति सुख पाते,

सिंधुरी हनुमत की महिमा गाते,

संकट मोचन है कालो के काल,सिंधुर की होली खेले

होली खेले अंजनी के लाल

बजरंग बलि को जो सिंधुर लगाते,

हर संकट से मुक्ति है पाते,

राम भक्तो को करे खुशाल सिंधुर की होली खेले

होली खेले अंजनी के लाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।