हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु,

क्यों तरसु खुशियों को मैं जो खाटू में आता हु,

हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु,

किस्मत मेरे पीछे गुलाम सी चलती,

मेरी सारी बला ऊपर के ऊपर ही टलती,

इज्जत की खाता हु मैं आंदन पाता हु,

क्यों तरसु खुशियों को मैं जो खाटू में आता हु,

हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु,

छूटा रोना धोना मैं हस के जीता हु.

सुख का धरना बेहता अमृत सा पीता हु,

अपना मैं ले जाता हु,जो मांगू वो पाता हु,

क्यों तरसु खुशियों को मैं जो खाटू में आता हु,

हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु,

जो खाटू में आये वो सदा ही मुस्काये,

फिर इसकी मोरछड़ी उस के सिर लहराए,

योगी बतलाता हु इसका दियां खाता हु,

क्यों तरसु खुशियों को मैं जो खाटू में आता हु,

हर पल मुस्काता हु मैं मौज उड़ाता हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।