ज़िंदगी शिव के रंग में है रंग गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो खेलु रे शिव संग होली,

संग में है फ़रिश्तो की टोली,

ज़िंदगी शिव के रंग में है रंग गई,

शिव तेरा रूप निराला है,

अतमा को पिया तू पालो है,

ऐसा रुहानो रंग तू डालो है.

जो हो गया मन मतवालों है,

जब चलाये ज्ञान पिचकारी होली मल ती आत्माये सारी,

तेरे प्यार के रंग में है रंग गई,

ज़िंदगी शिव के रंग में है रंग गई,

चाहु और ही तो अन्धयारा है बस मधुवन में उजियारा है,

शिव बाबा जो प्यारा प्यारा है,

मस्त रास का नजारा है,

सब छोड़ मैं उसकी होली उस के ज्ञान के रंगो में है रंग गई,

ज़िंदगी शिव के रंग में है रंग गई,

खुशिया खुशियां है ना कोई गम जब से मिला मुझे शिव साजन,

नाचे मयूर बन मोरा मन अब गाता हर पल मेरा मन,

दुःख की गड़ियां पूरी हो ली,

अब आनंद के रंग में मैं रंग गई,

ज़िंदगी शिव के रंग में है रंग गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।