रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे

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॥ पावन पाठ ॥

रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे,

ओ रखवाले शिरडी वाले किरपा दृस्टि कर दे,

रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे,

कह रही है जो दीवारे उनके साये,

कण तलक महफूज कोई दिल गबराये,

मैं अँधेरा दे सवेरा रोशनी कर दे,

रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे,

आये है बड़ी दूर से हम हारे हारे,

रेहम का तेरी मिले हो वारे न्यारे,

दुःख सितम की मेरे गम की कुछ कमी कर दे,

रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे,

तेरी ये दुनिया निराली,

रीत अनूठे कर भला तो हो भला अब लगदे झूठे,

आदमी में आदमी के गुण जरा भर दे,

रेहम नजर कर दे झोलियाँ मंगतो की भर दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।