राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे

जया किशोरी जी
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

राम शरण में ले चालूं मेरी पूछ पकड़ ले रे,

राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे ।

राजा हो कर चोरी सीखी, इज्जत करदी ख़ाक,

भूल गयो के तेरी बहन की लक्षमण काटी नाक ।

थोड़ा दिन की बात है रावण खूब अकड़ ले रे

राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे ॥

सीता माता ने हर लायो करके धोखा बाजी,

बाली से तू लुकतो डोले किथे गयी रंग बाजी ।

बच न सकेगा रावण जितना पाँव पटक ले रे,

राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे ॥

बनवारी कछु साधू मारेआ होयो बड़ो बलवान,

रिश्तेदारां से मिलने बस कुछ दिन का महमान ।

रावण क्यों बेमौत मरे मेरी बात समझ ले रे,

राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।