सारे जग की पालनहार मैया बस तू ही तू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जमी से आसमाँ तलक देख रहा हूँ

सितारों मे तेरे जलवो की झलक देख रहा हूँ

अब ओर किसी चीज़ की ओर किसी चीज़ की

मुझे क्या है जरूरत

माता तेरे मुखड़े की चमक देख रहा हूँ

तू ही तू माँ तू ही तू झंडेवाली तू ही तू

कहते वेद पुराण यही तुझसा माँ कोई जग मे नही

मेने देख लिया संसार मेने देख लिया संसार दिखे बस तू ही तू

सारे जग की पालनहार मैया जय तू ही तू

माँ जो तेरी करते हैं भक्ति

उनको माँ तू देती हैं शक्ति

नाम तेरा जो जपते हर पल

हर पल उनका ध्यान तू रखती

कोई चलने दे ना वार कोई चलने दे ना वार मैया बस तू ही तू

सारे जग की पालनहार मैया बस तू ही तू

जो घर तेरी जोत जगाते

जोत जगाते हर रोज जगाते

वो घर रोशनियो से भर जाय

कष्ट मिटे सब मौज मनाते

खुशियो से भरे घर बार खुशियो से भरे घरबार मैया बस तू ही

सारे जग की पालनहार मैया जी तू ही तू

चाहे कोई भेंट ले आये

चाहे खाली हाथ ही आए

बस एक प्रेम की भूख है तुझको

माँ प्रेम करे सो तुझको पाए

भगतो पे लुटाए प्यार भगतो पे लुटाए प्यार मैया बस तू ही तू

सारे जग की पालनहार मैया बस तू ही तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।