यह बिनती रघुबीर गुसांई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

यह बिनती रघुबीर गुसांई,

और आस बिस्वास भरोसो,हरो जीव जडताई,

चहौं न कुमति सुगति संपति कछु,रिधि सिधि बिपुल बड़ाई,

हेतू रहित अनुराग राम पद बढै अनुदिन अधिकाई,

कुटील करम लै जाहिं मोहिं जहं जहं अपनी बरिआई,

तहं तहं जनि छिन छोह छांडियो कमठ-अंड की नाईं,

या जग में जहं लगि या तनु की प्रीति प्रतीति सगाई,

ते सब तुलसी दास प्रभु ही सों होहिं सिमिटि इक ठाईं,

पद-तुलसी दास

संगीत और आवाज- राजकुमार भारद्वाज (पानीपत)

मो--90 3458 1000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।