भीगी पलके भीगा मन है घर जाना है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भीगी पलके भीगा मन है घर जाना है,

हो ग्यारस भी गई बारस बी गई घर जाना है,

खाटू से विदा की वेला है घर जाना है,

मेरे दिल में दर्द सा होता है,

क्या तुम हे होता है ,

मैं छुप छुप सब से रोटा हु क्या तू रोटा है,

बड़ा मुश्किल दर्द उठाना है घर जाना है,

खाटू से विदा की वेला है के घर जाना है,

मेरी आँखों में नींद नहीं होगी क्या सो पाओगे,

तुम्हे छपन भोग लगे होंगे क्या खा पाओगे,

खुद को ही खुद समजना है घर जाना है

खाटू से विदा की वेला है के घर जाना है,

बिन आप के न रह पाएंगे क्या रहलोगे,

हम ये तड़प नहीं सेह पाएंगे क्या सेहलोगे,

असुवन से अखियां विगना है घर जाना है,

खाटू से विदा की वेला है के घर जाना है,

हम तुम को भूल न पाएंगे क्या तुम भूलो गे,

तेरे बिन हम न जी पाएंगे क्या तुम जी लो गे,

मोहित जय श्री श्याम भुलाना है,घर जाना है

खाटू से विदा की वेला है के घर जाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।