हम वृन्दावन आ गए

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक तेरी, साँवरी सूरत से,

बस हो ही गया है, प्यार मुझे l

खा करके, ज़माने की ठोकर,

एक तूँ ही मिला, दिलदार मुझे l

मेरे इस, उजड़े गुलशन की,

अब तक न मिली है, बहार मुझे l

ओ नन्द लाला, अब देर न कर,

झट से दिखला, दीदार मुझे l

हो मुरली वाले, यार तेरा,

हो कमली वाले, यार तेरा,

प्यार पाने, आ गए,,,,

हम वृन्दावन lll आ गए,

हम वृन्दावन आ गए ll

तुझ बिन बीती, कितनी रातें

तुझसे करने, को कुछ बातें ll

मनमोहन, दिलदार तुमको ll

बिनती सुनाने आ गए,,,,

हम वृन्दावन lll आ गए,,,,,,,,

बिनती तुमसे, ये ही साँवरिया

तेरे दर पे, बीते उमरिया ll

वृन्दावन की, पावन रज को ll

मस्तक पे लगाने आ गए,,,,

हम वृन्दावन lll आ गए,,,,,,,

हम तो हैं तेरे, प्रेम दीवाने

दीवाने, तेरे मस्ताने ll

सारे जग को, ठुकरा के हम ll

तुमको रिझाने आ गए

हम वृन्दावन lll आ गए,,,,,,

पागल की, पागल ही मस्ती

भूल के बैठे, अपनी हस्ती ll

चित्र वचित्र भी, वृन्दावन की ll

महिमा गाने आ गए,,,,

हम वृन्दावन lll आ गए,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।