मैं तो खाटू जाउगा रोके न रुक पाउगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हिचकी ऊपर हिचकी आवे भुला रहा संवारा,

फागण की मस्ती में ये दिल हो गया वनवरा,

मैं तो खाटू जाउगा रोके न रुक पाउगा,

मोह माया का छूट जाता है जाके वहा झमेला,

मस्ती का महा कुंभ है मेला ये अलबेला,

लंदन देखा पेरिस देखा फिर भी ये दिल न भरा,

फागण की मस्ती में ये दिल हो गया वनवरा,

मैं तो खाटू जाउगा रोके न रुक पाउगा,

ज्ञान न रहता भले बुरे का मिट जाती है सारी गल,

मैं भी पागल तू भी पागल जिसको देखे वो पागल,

वो चाँद भी देखा तारे देखे फिर भी ये दिल न भरा,

फागण की मस्ती में ये दिल हो गया वनवरा,

मैं तो खाटू जाउगा रोके न रुक पाउगा,

खाटू जाने को जी मचले जिस को देखो तरसता है

बोली सारी ही दुनिया को ऐसा रंग बरसता है,

कितने सावन देखे जोगी फिर भी ये दिल न भरा,

फागण की मस्ती में ये दिल हो गया वनवरा,

मैं तो खाटू जाउगा रोके न रुक पाउगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।