आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया

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॥ पावन पाठ ॥

आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया,

सिंगियाँ वाले जोगी दा दर सब दे मन न भा गया,

आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया

चेत महीने सिद्ध योगी दा लगाया मेला भारी,

झंडे झड़े रोज झड़वान आ गई दुनिया सारी,

योगी वाली रेहमत दा रंग हर पासे छा गया,

आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया

लंगर चलदे चलन पंगुडे खूब दुकाना सजियां,

ढोल खड़के भंगड़े पेंदे किते ताड़ियाँ बजियां,

जिहने हाज़री आन लगाई मंगिया फल ओ पा गया,

आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया

राजू भी हरिपुरियाँ जोगी दे मेले विच आवे,

जोगी दा गुण गान है करदा साहिब अली भी गावे,

इस रत्नो दे पाली दे जग लान जैकारे आ गया,.

आ गया जी आ गया जोगी दा मेला आ गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।