गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

साई साई साई साई करि जांदी है,

गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है,

तू जे छड़ी डोर मेरी गुड्डी कट जाएगी,

तेरे बिना साई एह न कुछ कर पाएगी,

दुनिया नाल एह पेचे एह लाइ जांदी है,

गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है,

चढ़ी मेरी गुड्डी नु चढ़ाई रखी साइयाँ,

चरना दे नाल लगाई रखी साइयाँ,

साई तेरी महिमा एह गाई जन्दी है,

गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है,

जदो दा द्वारा मेरे साई तेरा फड़्या नाम दा सितारा मेरा दिनों दिन चढ़या,

दुनिया एह सारी सडी जन्दी है,

गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है,

मेहरा वाला मीह मेरे साई वरसाया है,

प्रकाश नाल जोनी रज रज के नहाया है,

रेहमता दी चढ़ी एह लाइ जन्दी है,

गुड्डी मेरी अम्बरा ते चढ़ी जांदी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।