मस्त मस्त दम मस्त मस्त

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्त मस्त दम मस्त मस्त दम मस्त दम मस्त,

पी के शिव दी भगति दा प्याला मैनु मस्ती चढ़ दी है,

आँखा विच मेरी टा शंकर दी मूरत वसदी है,

मस्त मस्त दम मस्त मस्त दम मस्त दम मस्त,

रोज सवेरे शिवलिंग ते हो मैं जल चढाउँदा,

मेरे वेहड़े विच खुशियां दा शंकर मीह वरसौंदा,

ऐसी किरपा है शिव दी ज़िंद मेरी हसदी वसदी है,

पी के शिव दी भगति दा प्याला मैनु मस्ती चढ़ दी है,

राति मैं ता शिव दे दर दे जगमग ज्योत जगावा,

मेरे घर दे हर कोने विच मैं ता रौनक पावा,

जो भी करदा ध्यान शम्भू दा नैया पार लगदी है,

पी के शिव दी भगति दा प्याला मैनु मस्ती चढ़ दी है,

जद भी लाइये नाम शंकर दा बिगड़ी बन दी जन्दी है,

बंद किस्मत दी मेरी तिजोरी हूँ ता खुल्दी जन्दी है,

तेरी रमज कोई न जाने कीरति शिवालये दसदि है,

पी के शिव दी भगति दा प्याला मैनु मस्ती चढ़ दी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।