बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये,

के होली खेलन राधा रानी संग बरसाने चलिये,

दीवाने चलिये चलो मस्ताने चलिये,

के होली खेलन राधा रानी संग बरसाने चलिये,

सब सखियों संग राधा मिल कर सांवरिया से बोली,

रंग बिरंगे फूलो के संग हम खेले गे होली,

के मारी दे पिचकारी राधा के उस नटखट छलिये,

बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये,

अरे भर कर गुलाल थाल ले आई राज दुलारी,

ारे आगे आगे दौड़ रहे है छलियाँ छेल बिहारी,

के रसिया के संग दौड़े ग्वाल बाल गली गली रे,

बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये,

अरे श्याम सखा संग खेलत होली बीच में राधा गोरी,

आये है करतारपुर से खेलन हम भी होली,

के जल्दी जल्दी दिल्ली पौंछ के आगे द्वारे मलिये,

बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये,

सझ धज के सब घर से निकले बना के देखो टोली,

अरे बरसाने में धूम मची है होली है होली,

के आओ सब मिल झूल के राधा नाम के रंग में रंगिये,

बरसाने चलिये चलो बरसाने चलिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।