श्री वृष्भानु दुलारी हमे प्रानन से प्यारी

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री वृष्भानु दुलारी हमे प्रानन से प्यारी

हमें प्रानन से प्यारी हमें प्रानन से प्यारी

सकल ब्रिज की महरानी किशोरी राधा रानी

दया करुना की सागर नही कोई इनका सानी

यही सन्तन हितकारी यही रस्कन को प्यारी

श्री.......

जो इनकी शरन मे आये प्रेम भक्ति रस पाये

कही आये ना जाये वही आनन्द मनाये

वही इनकी मनुहारी महिमा जग से नयारी

श्री.......

सकल भ्रमांड भी देखो श्री चरनं पे वारा

रचा जिसने जग सारा वो इनके आगे हारा

फिरे आगे पिछाड़ी पुकारे प्यारी प्यारी

श्री........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।