दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ

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॥ पावन पाठ ॥

दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ,

मेरे उते मेहर करि,

तेज गम दियां बदलियां छाइयाँ मेरे उते मेहर करि,

दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ,

तू मेरा दाता बेअंत स्वामी,

नाम तेरा सिमर के हो गई दीवानी,

तेरे चरना च अर्जियां लाइयाँ मेरे उते मेहर करि,

दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ,

तेरी ओट तेरे ही सहारे आई हा गुरु जी तेरे ही द्वारे,

तनु दिल दियां खोल मैं सुनाई आ ,

मेरे उते मेहर करि,

दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ,

चरण तेरे दी दासी बन जावा,

जन्म जन्म दी प्यास भुजावा,

एहो आसा लेके तेरे दर आई आ,

मेरे उते मेहर करि

दुरो चल के मैं तेरे दर आई आ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।