मैं तेरी रजा में राजी सँवारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चाहे मिले मुझे गम चाहे मिले खुशियां,

मंजूर है मुझको ये दोनों सांवरियां,

मैं तेरी रजा में राजी सँवारे मिलती रहे किरपा की छाव रे,

सँवारे तेरी ही किरपा की दरकार है,

है ज़िंदगी जो मेरी ये सँवारे है तेरी,

तेरे ही आसरे ही चल रही है,

तेरी मेहर का असर ऐसा हुआ है मुझ पर,

मेरी मुसीबते टल रही है,

तेरी शरण हर दम रहे सँवारे हर दम,

यही तमना मेरी रहु हर जन्म,

मैं तेरी रजा में राजी सँवारे मिलती रहे किरपा की छाव रे,

सँवारे तेरी ही किरपा की दरकार है,

मालिक तू मेरा तू दाता मेरे भगाये का विद्याता तू ही मेरा है सहारा मेरे सँवारे,

मेरे श्याम तुझको पा कर जीता हु बेफिक्र चिंता तुझको सौंप के मेरे सँवारे,

एह मेरे दीना नाथ रहना यु ही साथ सिर पे हमेशा मेरे रखना दोनों हाथ,

मैं तेरी रजा में राजी सँवारे मिलती रहे किरपा की छाव रे,

सँवारे तेरी ही किरपा की दरकार है,

मेरी चाहते की मंजिल मेरी ख्वाशिहो का साहिल,

अरमानो का महल है मेरे सांवरे.

दिलदार मेरा दिलबर मेरे प्यार का समुन्दर,

मेरा मुकदर है तू मेरे सँवारे,

तू ही मेरी अर्जु तू ही मेरी यूस्ट यु कुंदन कहे मेरा बाबा बस तू ही तू,

मैं तेरी रजा में राजी सँवारे मिलती रहे किरपा की छाव रे,

सँवारे तेरी ही किरपा की दरकार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।