सदक़े मैं जावाँ वारी मैं जावाँ

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॥ पावन पाठ ॥

सदक़े मैं जावाँ, वारी मैं जावाँ,

त्वानूँ गुरूजी जद जद वेखाँ ,

हथ मैं जोड़ाँ, सीस झुकावाँ ,

त्वानूँ गुरूजी जद जद वेखाँ ,

दिल दे अंदर वास वे तेरा,

अखियाँ विच वी रैन्दे हो,

नाल ही चलदे, नाल ही फिरदे

नाल ही उठदे बैन्दे हो,

फेर मैं कल्ली क्यों अखवावाँ,

त्वानूँ गुरूजी जद जद वेखाँ,

जिस पासे वी नज़र घुमावाँ,

हो जाँदा दरशन तेरा ,

रूप रंग सुर ताल दे विच वी,

तैंनूँ वेखे मन मेरा,

रज रज तेरियाँ सिफ़्ताँ गावाँ,

त्वानूँ गुरूजी जद जद वेखाँ ,

लगन लगा के अपणी सानूँ ,

दूर कदे वी करना ना,

जीवन दी नैया ने फिर ते,

डुब जाणा ए तरना ना,

अपणा 'साहिल' सन्मुख पावाँ,

त्वानूँ गुरूजी जद जद वेखाँ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।