कभी दुःख है कभी सुख है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कभी दुःख है कभी सुख है वक़्त का ये तराना है,

शक्ति देना हमे बाबा गमो में मुश्कुराना है,

सफर ये है बड़ा मुश्किल साई आसान कर देना.

पाँव कांटे चुबे जब जब साई मुस्कान कर देना,

ना हारु हर कर खुद में सफर आगे बढ़ाना है,

नेकियों के मुबारक रास्तो पे चलते जाना है,

कभी दुःख है कभी सुख है........

कभी न रूठने हमसे आबरू आ बचा लेना,

आप को भूल से भूले तो भी बाबा निभा लेना,

बदी से दूर हो कर आप को दिल में वसाना है,

शिरडी के रस्ते चल कर साई के द्वारे जाना है,

कभी दुःख है कभी सुख है.....

नाथ जब साथ तुम होंगे छल कपट दूर सब होंगे,

चाँद तारो से जीवन में हज़ारो नूर सब होंगे,

सूखा कर मौज नफ़रत की प्यार साई का पाना है,

अँधेरे आप की भक्ति से जीवन के मिटाना है,

कभी दुःख है कभी सुख है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।