सखी री चल बरसाने की और

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सखी री चल बरसाने की और,

महीना फागण को आयो री,

वहा अब मिले गए नन्द किशोर महीना फागण को आयो री,

सखी री चल बरसाने की और,

कोई तन रंगे कोई मन रंगे कोई श्याम रंग जीवन रंगे,

अरे सब न कशू न कशू रंगो मैंने रंग ली प्रीत की डोर,

अरी री सखी री चल बरसाने की और.........

कोई गिद्ध रंगे कोई गाली रंगे कोई मन में छवि निराली लगे,

थारे जापे तेरो रंग चङोन चढ़े रंग न कोई और,

सखी री चल बरसाने की और.......

कोई खाब रंगे कोई ख्याल रंगे कोई केसर बीच गुलाल रंगे,

अरे बरसाने की गलियां में आज हो रही जोरम जोर,

सखी री चल बरसाने की और,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।