पहाड़ा विच रेहन वालिये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर दी मैं ख़ाक बन जावा,

पहाड़ा विच रेहन वालिये,

तेरे दर दी मैं मंगती कहावा,

पहाड़ा विच रेहन वालिये,

तेरे चरना दी धूल मथे नाल लावा मैं,

लख लख वरि तेरा शुक्र मनावा मैं,

हर साह नाल गुण तेरे मैं गावा

पहाड़ा विच रेहन वालिये,

तेरे दर दी मैं करा सेवा सुबह शाम माँ,

भूल के एह जग सारा लावा तेरा नाम माँ,

एह तन मन लेखे तेरे लावा,

माँ मंदिरा च रेहन वालिये,

तेर दर दी मैं ख़ाक बन जावा.....

नैना न प्यास माँ तेरे ही दीदार दी,

मैनु बस लोड मैया तेरे ही प्यार दी,

जॉली वांग तेथो झोलियाँ भरावा,

मनी वांग तेथो झोलियाँ भरावा,

पहाड़ा विच रेहन वालिये....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।