दर्द सहा न जाये हाय मुझको साई की याद सताये

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॥ पावन पाठ ॥

दर्द सहा न जाये हाय मुझको साई की याद सताये,

मौत से पहले मैं तुझे देखु,तूने मेरे सपने सजाये,

याद सताये याद सताये,

जोगन बनी हु बिरहा में तेरी ,

मेरा नसीबा साई बनाये,

याद सताये याद सताये,

तन्हाई में दू मैं दुहाई,

साई मेरे घर काहे ना आये,

याद सताये याद सताये,

दर्द सहा न जाये हाय मुझको साई की याद सताये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।