तेरे दर्श को अखियां प्यासी

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर्श को अखियां प्यासी,

दर्शन दो साई नाथ,

भोर बई चिड़ियाँ चेह चहाये,

बैठी हु तेरे द्वार,

इक झलक जो तेरी देखु बेडा लगा दो पार,

तेरे दर्श को अखियां प्यासी,

पलके बिशा के राह निहारु आ जाओ साई नाथ,

ताने है मारे मुझको दुनिया लाज है तेरे हाथ,

तेरे दर्श को अखियां प्यासी,

अशवन की बतियाँ सुन लेता,

साई मेरे नाथ सबके बिगड़े काज बनाये,

मेरी भी सुन फर्याद,

तेरे दर्श को अखियां प्यासी,

छोड़ गये सब संगी साथी तेल बिना जैसे हो बाती,

तो न मुझको यु ठुकराना तू ही मेरा भगवान,

तेरे दर्श को अखियां प्यासी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।