पत्थरां च रहन वालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हंजू मुक चल्ले साह सुक चल्ले,

नित दुखां विच कुमला के,

मायें नी क्यों तू हाल असां दा,

पुछेया न कदे आके।

काहनूं हो गया पत्थर दिल तेरा,नी पत्थरां च रहन वालिये,

साथों रूसेया है सुख दा सवेरा,चारे पासे सानू दिसदा हनेरा,

केहड़ी गुफ़ा विच ला लिया तूँ डेरा,नी पत्थरां च रहन वालिये,

वास्ते भी पाये बहुत कड्डियाँ लकीरां माँ,

क्यों न जगाइयां गईया तैथों तक़दीरां माँ,

असीं कर्मा दे मारे, वाजा मार मार हारे,

बड़ा पाया ये मुसीबतां न घेरा,

केहड़ी गुफ़ा....

बिछियां ही रहियां सूलां पैरां थल्ले तिखियाँ,

क्यों साडे लेखां विच पीड़ां ही तू लिखियाँ,

ठेडे ठोकरां दे सहन्दे, भुवां मार के जो कहन्दे,

सानू झैमतां ने पिचेया वथेरा,

केहड़ी गुफ़ा....

आजा वेल कढ्ढ के माँ इक दो ही घड़ियां,

बच्चेयाँ दे नाल माँपे करदे नी अड़ियां,

सुत्ति ममता जगा के, रहम दुखियाँ ते खा के,

पाजा हुन ते गरीबां घर फेरा,

केहड़ी गुफ़ा,,,,,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानियां, सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।