श्यामा तू न आयो वे श्यामा पै गईया

नरेन्द्र चंचल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा तू न आयो वे, श्यामा पै गईया

सारे तुर गए घरा नु, कल्ली रह गयी आ

तुहिओ आखिया सी शामा मैं हाँ भूखा प्यार दा

नठ्ठा आना वा जदो कोई वाजा मारदा

तेरे छुठेया ही लारिया ते रह गयी हां

श्यामा तू न आयो...

राधे रानी नाल रास तू रचंदा होवेंगा

ग्वाल बाला नाल गौआ तू चरनदा होवेंगा

दुःख तेरे विछोड़ेया दे सेह गयी हां

श्यामा तू न आयो...

तू हैं सारिया दा, मेरा तां सहारा तू है

मेरी जिंदगी दी बेड़ी दा किनारा तू है

वे मैं मीरा वांगु तेरी हो के रह गयी आ

श्यामा तू न आयो...

मन चंचल है साडा किते टिक्दा नहीं

प्यार कदे वी दुकाना उत्ते विक्दा नहीं

गल्ला सारिया ही आज ते मैं कह गयी आ

श्यामा तू न आयो...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।