भंग पी के हो गया भोला मस्त मलंग नी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

काजू मिशरी मेवे पाके गौरा ने रगड़ी भंग नी,

भंग पी के हो गया भोला मस्त मलंग नी,

भंग प्याला घट घट करके पी गया भोला शंकर,

भंग दी भुटटी पी के कहंदा कंडा लगे न कंकर,

धरती गगन पताल नी ऑडियो रंग गे शिव दे रंग नी,

भंग पी के हो गया भोला मस्त मलंग नी,

डमरू वजे नंदी नाचे नचन शिव घन सारे,

पारवती माँ नाल कार्तिके गणपति लें नजारे,

कैलाश हिमालया पर्वत ते आज बज दी मिरदंग नी,

भंग पी के हो गया भोला मस्त मलंग नी,

जो जोगी पी भंग प्याले त्यों त्यों रेहमत बरसे,

चरना दी मोह खातिर मांगी दा दिल तरसे,

भेत वालिया नु कोई दसदो कुलविंदर नु कोई आके दसदो,

शिव नु मनाउन दा ढंग नी ,

भंग पी के हो गया भोला मस्त मलंग नी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।