गोरजा दा लाडा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रल मिल सखियाँ आखन लगियाँ लाडा किथों आया,

इस लाडे ने दुनिया नालो वखरा वेश बनाया,

नि एह केहड़े पिंडो आया गोरजा दा लाडा,

लोक ता लौंडे अतर फ्लेला,

एह भभूति मल लाया गोरजा दा लाडा,

एह साधु बन आया गोरजा दा लाडा,

लोका दी जञ्ज विच सोहने बाराती,

एह ता भुत चढ़ेला लाया गोरजा दा लाडा,

होर ता पो दे होर लुटा दे,

नहीं एह फनिहार पा लिया,

एह कला नाग ले आया गोरजा दा लाडा,

लोका दे लाडे यैंकी शेंकी,

एहने ढाडा बड़ा बढ़ाया गोरजा दा लाडा,

लोकि ता आउंदे घोड़ी चढ़ के,

नि ऐ बैल ते चढ़ के आया, गोरजा दा लाडा,

गोरा दे लाडे दी शान निराली,

जिद्दी तीन लोक ते माया, गोरजा दा लाडा,

वधाहियाँ गोरा तनु वधाहियाँ जी,

वधाई तेरी माता नु पिता नु इस पंडित नु,

सब आई होइ संगत नु,

वधाहियाँ गोरा तनु ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।