मठा मठा चिमटा वजावे जोगी

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॥ पावन पाठ ॥

मठा मठा चिमटा वजावे जोगी मठा मठा चिमटा वजावे,

छन छन चिमटा वजावे जोगी छन छन चिमटा वजावे,

मस्ता नु मस्त बनावे जोगी भगता नु मस्त बनावे,

मठा मठा चिमटा वजावे जोगी .....

बनखंडी जा गौआँ चारियां बोड चो रोटियां कड दिखाइयाँ,

धरती विचो लासी सी कड़ी कीतियां फसला झुन सिवाइयाँ,

रत्नो नु कोदक विखावे जोगी,

मठा मठा चिमटा वजावे जोगी

हेठ गरु ने धुना लाया गोरख दा सी मान गवया,

कना विच न मुंद्रा पइयाँ मंडली ने सी जोर लगाया,

मोर उदारियाँ लावे जोगी ,

मठा मठा चिमटा वजावे जोगी

विच गुफा दे आसान ला के बह गया जोगी मंदिर सजा के,

वीरका दा बलिहार है कहंदा संगत जांदी दर्शन पाके,

भगता दियां आस पूजावे जोगी,

मठा मठा चिमटा वजावे जोगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।