एह उमा पति भोला शंकर मैं अपना तुझे बना लुंगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं बही दीवानी तेरे नाम की तन में बस्म रमा लुंगी,

एह उमा पति भोला शंकर मैं अपना तुझे बना लुंगी,

मेरा सूट जोगीरा मल मल का,

हय भीग गया गंगा जल में,

इतने नाजुक है पैर मेरे फिर भी पौंची हु चल चल के,

इस पतित पावनी गंगा से,

अपने शिव को नेहला दूंगी,

एह उमा पति भोला शंकर मैं अपना तुझे बना लुंगी,

तेरे जटा जुट पे चंदा सा,

निर्मल मेरी भक्ति गंगा सा,

हे सती पति संताप हरो,

न दूर करो मुझे पास रखो,.

चदे भंग सा बई भावली,

तुझमे खुद को खपा लुंगी,

एह उमा पति भोला शंकर मैं अपना तुझे बना लुंगी,

शंकर कंकर देखू हर हर बम बम का नाम जपु,

पूजा पुनीत संग थाल लिए,

बेहाल खड़ी क्या हाल कहू,

ॐ नमः शिवाये ॐ नम शिवाये,

शिव सांसो में बसा लुंगी,

एह उमा पति भोला शंकर मैं अपना तुझे बना लुंगी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।