मेरा किसे ना पूछिये हाल माँ

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा किसे ना पूछिये हाल माँ मैनु ला चरना दे नाल माँ

माँ तेरे दरबार दी ऊँची निराली शान है

तेरा जो वी हो गया, तू रखेया उसका मान है

कदे आया ना मेरा ख़याल माँ, मैनु ला चरना...

याद आई रो लिया, बुल्ल सी लए कई वार मैं

वस ना चलेया बेबस हो गया आ गया दरबार मैं

हुन दई ना मैनु टाल माँ, मैनु ला चरना...

लगेया ऐसा रोग जिसदी दवा ना कोई वैद माँ

जे तू चावे मूक वी सकदी जन्मा दी यह कैद माँ

आ हुन ते मैनु संभाल माँ, मैनु ला चरना...

विनती मेरी दातीये हुन ते करो परवान माँ

कर देओ जीवन दी हर मुश्किल मेरी आसान जी

करो पुरे सबदे सवाल माँ, मैनु ला चरना...

झोली अड्ड के बह गया आ मैनु दीदार दे

लखां पापी तर गए ने मैनु वी माँ तार दे

‘दर्शी’ वी तेरा लाल माँ, मैनु ला चरना...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।