शिव तो ठहरे सन्यासी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव तो ठहरे सन्यासी गौरा पछताओगी,

भटको गी वन वन में चल नही पाओगी,

शिव तो ठहरे सन्यासी गौरा पछताओगी,

महलो में तू रही गोरा राज कुमारी बन के,

भांग और धतूरे के रगड़ तुम लगाओ गी,

शिव तो ठहरे सन्यासी गौरा पछताओगी

तन पे भभूती उनके पहने मर्ग शाला है,

देख के रूप उनका गिरा डर जाउगी,

शिव तो ठहरे सन्यासी गौरा पछताओगी

गोरा बोली सखियों से तुमें क्या पता सखियों,

कैसा वर पाया मैंने तुम कहा से लाओ गी,

शिव तो ठहरे सन्यासी गौरा पछताओगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।