भरलो झोलियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भरलो झोलियां (भर माँ देंदी),

सबनां दे दुख (हर माँ देंदी),

मेहराँ दा हथ धर माँ देंदी,हॉवे जदों दयाल,,

अज्ज दर्शन करलो(जय हो),

भंडारे भर लो (जय जय),

लग के चरणां नाल अज्ज दर्शन करलो,,,,,,

पलां विच मार देंदी रेख विच मेख माँ,

भगतां दे सुतड़े जगाउंदी आप लेख माँ,

निर्धन ताईं (माया देंदी),

कोहड़ियाँ ताईं (काया देंदी),

जो एहदे मन आया देंदी,करदी मालामाल,,,

अज्ज दर्शन करलो(जय हो),

भंडारे भर लो (जय जय),

लग के चरणां नाल अज्ज दर्शन करलो,,,,,,

खुशियां च वंडदी है घर घर लोहड़ीयां,

जिहना भैणां ताईं देवे वीरां दियां जोड़ियां,

दुनियां नूँ माँ (दातां वंडदी),

भगतां ताईं (सौगातां वंडदी),

सब आप खैरातां वंडदी,पूरा करे सवाल,,

अज्ज दर्शन करलो(जय हो),

भंडारे भर लो (जय जय),

लग के चरणां नाल अज्ज दर्शन करलो,,,,,,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानियां, सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।