इक जोगण अर्ज गुजारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक जोगण अर्ज गुजारे, हथ जोड़ के माँ दे द्वारे,

ओहनू तीर्थां ते जान दी वी लोड़ न,

धक्के दर दर खान दी वी लोड़ न,

करे सत्कार जो बुजुर्गां दा रब ओहनू मिले भज्ज के,

इको वारी ज़िन्दगी च मिलदे ने माँपे सेवा करो रज्ज के,,,,,,,,

सुखी बच्चेयाँ दी ज़िन्दगी बनाऊँण लयी,

दिन रात ने कमाइयां माँपे करदे,

भावें किन्ना वड्डा दुख होवे आप नू,

पर बच्चेयाँ दा दुख नहींयों जर्दे,

बिनां माँपेयां दे कौन छावां करदा, मिले न मिसाल जग ते,

इक वारी जिंदगी,,,,,,,,,,,,,

हुन्दी माँपेयाँ दी सेवा जेहड़े घर न,

मुँह रब वी है ओथों मोड़ छड्डदा,

सब पीरां ते फ़कीरां ने वी मनेयां,

माँपे हुंदे ने पूजा रूप रब्ब दा,

वाणी पढ़िये मत्थे ते टिक्के ला लयीये ते भावें लख जाइये हज्ज ते,

इको वारी ज़िन्दगी,,,,,,,,,

सोने चाँदी हीरे मोतियाँ दे नाल वे,

माँपे मिलदे बज़ारां विच मुल्ल न,

सेवा करके असीसां लो रज्ज के,

देव आखदा ऐ जावो तुसीं भुल्ल न,

गल्ल मन लाई जिन्नाने पल्ले बन्न लाई ओहना तो मैं जावाँ सदके,

इक वारी ज़िन्दगी,,,,,,,,,

Pandit dev sharma

Shri durga sankirtan mandal

Rania sirsa

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।