मैं तेरे दर पे आया हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं तेरे दर पे आया हूँ, कुछ करके जाऊंगा,

झोली भर जाऊंगा या मर के जाऊंगा,

तू सब कुछ जाने है, हर ग़म पहचाने है,

जो दिल की उलझन है, सब रौशन है,

तू मेरी सहनशाह है,ये बंदी निर्धन है,

तेरी शौहरत सुन सुन के फ़रियादें लाया हूँ, मैं,,,

तू सब कुछ जाने है, हर ग़म पहचाने है,

जो दिल की उलझन है, सब रौशन है,

अब ये सर फूटेगा, सर इस दर टूटेगा,

जो दुनियां चाहे झुके तेरा पल्ला न छूटेगा,मैं,,,,

वैष्णों का नज़ारा है, मंजर हमें प्यारा है,

मैया का द्वारा है, गंगा की धारा है,

ये बंदा पागल है, बस तेरा क़ायल है,

तेरी शौहरत सुन सुन के फरियादें लाया हूँ,मैं,,,,,

मैं न हरगिज़ इधर से उधर जाऊँगा,

मैं जिधर जाऊँगा तेरा कहलाऊंगा,

भीख दोगी तो इस दर से तर जाऊँगा,

वरना कह के ये चरणों में मर जाऊँगा, मैं,,,,,,,,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानियां, सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।