नहीं छड़ना कदी नहीं छड़ना

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॥ पावन पाठ ॥

नी मैं जाना जाना वे बाबा दे नाल,

नहीं छड़ना कदी नहीं छड़ना कदी नहीं छड़ना,

ना मैं मांगू हीरे मोती ना मैं मांगू सोना चांदी,

नहीं बन न नहीं बन न मुझे बड़ा शाहूकार नहीं बन न,

नी छड़ना कदी नी छड़ना कदी नहीं छड़ना,

नी मैं जाना जाना वे बाबा दे नाल,

मैंने भी घर में दिए जलाये साईजी मेरे घर में आये,

नहीं जाना कदी नहीं जाना,

बाबा मेरे घर से कदी नहीं जाना,

नी मैं जाना जाना वे बाबा दे नाल...........

कोई मुझको पागल बोले,

कोई बोले मस्त मलंगा,

कहने दे उन्हें कहने दे,

बाबा का दीवाना मुझे कहने दे,

नी मैं जाना जाना वे बाबा दे नाल,

छप्पन भोग का भोग लगाया,

साई घर घर बांटने आया,

चख लें दे मैनु चख लें दे बाबा का भंगरा मैनु

नी मैं जाना जाना वे बाबा दे नाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।