शिव रह गऐ अकेला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा चली गई मेला रे शिव रह गऐ अकेला

पठरा गांव मे मेला भरो है,

मेला मे चाट का ठेला लगो है

ठेला मा पेलमपेला रे,शिव रह गऐ....

गौरा संग नंदी भी गओ है,नंदी भी गओ श्र्रंगी भी गओ है

चले गऐ शिव जी के चेला रे ,शिव रह गऐ.....

जाबे का मन उनको मी रहो है

पर हाथ मे रहे न धेला रे,भोला रह गऐ....

ईश्वर कहे भोला धीरज धारो

मेला मे बहुत झमेला रे,भोला रह गऐ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।