कमइले हीरा चाहे मोती

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कमइले हीरा चाहे मोती कफ़न में जेब नहीं होती,

चाहे तू पी फिरिज को पानी, चाहे तू पी ले नल को पानी

प्यास सब एक सी होती, कमइले हीरा चाहे मोती ॥

चाहे तू खाये ले घी की रोटी, चाहे तू खाये ले सुखी रोटी

भूख सब एक सी होती , कमइले हीरा चाहे मोती ॥

चाहे तू सो जा डबल बेड पर, चाहे तू सो जा टूटी खाट पर

नींद सब एक सी होती , कमइले हीरा चाहे मोती ॥

कमइले हीरा चाहे मोती कफ़न में जेब नहीं होती ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।