कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो

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॥ पावन पाठ ॥

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

रहने दो साई चरणों में मुझे रहने दो,

जो हम पे गुजरती है साई वो तुम को सुनाने आ गये,

साई अब तो देख लो तेरे दीवाने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

अब कौन सुने फर्याद मेरी,

दामन फैलाने आ गये,

दया नजर की डाल दो बाबा तेरे दीवाने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

श्रदा से खड़े है पुजारी तेरे आ शीश झुकाने आ गये,

दया नजर की डाल दो बाबा तेरे दीवाने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

हां धूल तेरे चरणों की हम माथे पे लगाने आ गये,

जपते हुए तेरे नाम की माला जग से बेगाने आ गये,

दया नजर की डाल दो बाबा तेरे दीवाने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

मेरे साई राम तुम्हारी मुझ पे किरपा ऐसी हुई,

साई की छैया में हम तकदीर बनाने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

मेरे साई नाथ के जैसा सारे जग में कोई नहीं,

वस्ती वस्ती शोर उठा साई मस्ताने आ गये,

कहने दो कहने दो साई का दीवाना मुझे कहने दो,

आ गये आ गये साई के हम दीवाने आ गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।