रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे,

चा दिल विच नच उठियाँ भर गये नैन ख़ुशी नल मेरे,

रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे,

तेरा धुप दिखा के मैं ध्यान जदो सी लाया,

मेरे मन दे मंदिर दा कुंडा आन तुसा खड़काया,

तक सोहनी सूरत नु नच पाई रोनक दिल दे वेहड़े,

रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे,

मेरे धुंदले नैना ने तेरी झलक जदो इक पाई,

चढ़ दे सूरज वांगु हो गई जीवन विच रुशनाइ,

तेरे नाम दी ज्योति ने कर ते पल विच दूर हनेरे,

रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे,

तेरे संग ला लाइया लगियाँ तू भी तोड़ निभावी,

मेरे मन दे आसन तो उठ के फेर कदे न जावी,

सूखा रमा राहो दा बह गया ला चरना विच डेरे,

रूह गाद गाद होगी वे जोगियां दर्शन करके तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।