तू कर बंदगी और भजन धीरे धीरे

मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

तू कर बंदगी और भजन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण धीरे धीरे ।

दमन इन्द्रियों का तू करता चला जा ।

तो काबू में आएगा यह मन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

सुने कान तेरे सदा वेद वाणी ।

तू कर भागवत का श्रवण धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

सफर अपना आसान करता चला जा ।

तो छूटेगा आवागमन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

तू दुनिया में शुभ काम करता चला जा ।

तू कर शुद्ध अपना चलन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

मिलेगा तुझे खोज जिसकी है तुझको ।

धरम से जो होगी लगन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

कदम नेक राहों पर धर्ता चला जा ।

मिटेगा यह आवागमन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

छडक जल दया का तू सूखे दिलों पर ।

बसेगा ये उजड़ा चमन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

लगा मुख को प्याला तू सत्संग वाला ।

मिटा देगा दर्द कुहन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

कोई काम दुनिया में मुश्किल नहीं है ।

जो करते रहोगे यतन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

दमन इन्द्रियों का तू करता चला जा ।

बना शुद्ध चाल चलन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

गुरु सेवा तेरी, तेरी देश भक्ति ।

उठाएगी तेरा वतन धीरे धीरे ।

मिलेगी प्रभु की शरण...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।