भवनों पे ज्योत जगमगाये माता

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भवनों पे ज्योत जगमगाये माता,

आरती पुजारी तेरी गाये माता,

आरती गये तेरी आरती गाये,

भवनों पे ज्योत जगमगाये माता,

ज्वाला करे सारे जग में उजाला,

दुर्गा माँ खोलेती किस्मत का ताला,

जय जवाला मैया नमो नम,

जय दुर्गे मियां नमो नम,

फल फूल चुनरी चढ़ाये माता,

आरती पुजारी तेरी गाये माता,

झूम झूम नृत्य करे यहाँ महाकाली,

लीला दिखाए यहाँ माँ शेरोवाली,

जय महाकाली नमो नमः,

खपर वाली नमो नम,

माँ ज्योति वाली नमो नम,

भक्तो का कष्ट मिटाये माता,

आरती पुजारी तेरी गाये माता,

चमुंडा माँ की सुन किलकारी,

असुरा की सेना कांप रही सारी,

माँ चामुंडा नमो नम,

माँ दुर्गा रुपी नमो नम,

भव सागर तारणी नमो नम,

भक्त तेरी जय जय भुलाये माता,

आरती पुजारी तेरी गाये माता,

भगतो की मनसा पूरी करे मनसा,

माँ चंडी सबके भण्डार भरे,

माँ मनसा रानी नमो नमो,

माँ चंडी देवी नमो नमः,

माँ मनसा चंडी नमो नम,

वैरागी शीश झुकाये माता,

आरती पुजारी तेरी गाये माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।