एक तू ही सार है संसार तेरे चरण में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक तू ही सार है संसार तेरे चरण में,

नील लोहित तार देने आ गया तेरी शरण में,

उपकार कर अब तार दे तीनो जगत के पार कर,

श्री कंठ अविनाशी अनंग विरूपाकश वैरागी शिवम्,

शिवम् शिवम् शिवम्

दीं भाव दया निधि गिरी प्रिया वेदा की शिवम् ,

काल भी महाकाल भी सर्वज्ञ है आदि शिवम्,

रुदर तेरे क्रोध का इक अंश ही है पल अभी,

हे त्रिलोचन बिगड़े जो तू भस्म कर दे जगत ही,

कण कण में शन शन में व्यापत है हर दम शिवम्,

शिवम् शिवम् शिवम्

अर्थ है तू निरथ भी ज्ञान और अज्ञान भी,

शिवो परी इस जगत में कुछ नहीं कुछ भी नहीं,

अप वर्ग परगता रख भवम श्री कंठ मृत्यु न जये शिवम,

भस्म अंग जटा में गंग त्रिकाल दर्शी सदा शिवम् ,

हर हर शाश्वत समे में अज अमर अव्ये शिवम्,

शिवम् शिवम् शिवम्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।